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बवासीर / फिशर / फिस्टुला

गुदा की आम समस्याओं — बवासीर (पाइल्स), फिशर और फिस्टुला — की जांच और इलाज।

हमारे डॉक्टरों द्वारा जांचा गया 4 सवालों के जवाब

बवासीर / फिशर / फिस्टुला क्या है?

बवासीर (पाइल्स) गुदा के अंदर और आसपास की सूजी हुई रक्त नलिकाएं हैं। फिशर गुदा की त्वचा में एक छोटी दरार है, जो आमतौर पर सख्त मल के कारण होती है। फिस्टुला (भगंदर) गुदा नली के अंदर और त्वचा के बीच बनी एक असामान्य सुरंग है, जो अक्सर फोड़े के बाद बनती है।
ये समस्याएं आम हैं और इनका इलाज संभव है। डॉक्टर को दिखाने में झिझकें नहीं — सही समस्या जानने के लिए जांच ज़रूरी है।

आम संकेत और लक्षण

  • मल त्याग के दौरान या बाद में खून आना
  • मल त्याग के समय दर्द या जलन
  • गुदा के पास गांठ या सूजन
  • गुदा के पास मवाद या पानी निकलना, या फोड़ा
  • खुजली या जलन

इनमें से कोई लक्षण होने का मतलब हमेशा यह बीमारी होना नहीं है। जांच के बाद केवल डॉक्टर ही बता सकते हैं।

इलाज कैसे होता है

शुरुआती बवासीर और फिशर अक्सर रेशेदार (फाइबर वाले) खाने, भरपूर पानी, गुनगुने पानी में बैठने (सिट्ज़ बाथ) और दवाओं से ठीक हो जाते हैं। इनसे फायदा न हो तो समस्या के अनुसार कोई प्रक्रिया या सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
फिस्टुला में आमतौर पर सर्जरी की ज़रूरत होती है। जांच के बाद डॉक्टर आपको उपयुक्त विकल्प समझाएंगे।

रिकवरी (ठीक होना)

ठीक होना समस्या और प्रक्रिया पर निर्भर करता है। ज़्यादातर लोग कुछ दिनों से लेकर दो हफ्तों में सामान्य काम पर लौट आते हैं। मल को नरम रखना, पर्याप्त पानी पीना और उस जगह को साफ रखना जल्दी ठीक होने में मदद करता है और समस्या दोबारा होने की संभावना कम करता है।

खर्च

खर्च आपकी स्थिति, प्रक्रिया के प्रकार, ज़रूरी जांचों और अस्पताल में रुकने की अवधि पर निर्भर करता है। डॉक्टर की जांच के बाद ही इसका अनुमान बताया जा सकता है। जानकारी के लिए कृपया क्लिनिक से संपर्क करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

नहीं। खून आने के दूसरे कारण भी हो सकते हैं, जिनमें से कुछ गंभीर होते हैं। खुद इलाज करने की बजाय हमेशा डॉक्टर से जांच करवाएं।

नहीं। कई मरीज़ खान-पान में बदलाव और दवाओं से ठीक हो जाते हैं। लक्षण बने रहने या गंभीर होने पर प्रक्रिया या सर्जरी पर विचार किया जाता है।

डॉक्टर धीरे से जांच करते हैं और हर कदम समझाते हैं। दर्द वाला फिशर हो तो जांच को जितना हो सके आरामदायक रखा जाता है।

हो सकती हैं। कब्ज़ से बचना, रेशेदार खाना, पर्याप्त पानी पीना और शौचालय में ज़्यादा देर ज़ोर न लगाना जोखिम कम करता है।

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